फूलों की अंजुमन में ये तसकीरा है आज फिर से बहार आयी हैं, अहले चमन के बाद। फूलों की अंजुमन में ये तसकीरा है आज फिर से बहार आयी हैं, अहले चमन के...
किसी अहले नज़र को किसी अहले नज़र को
लक्ष्य पाना है कर पूर्ण समर्पण है नितांत निस्वार्थ बालपन। लक्ष्य पाना है कर पूर्ण समर्पण है नितांत निस्वार्थ बालपन।
उनका ये बचपना देख हम बड़े भी कभी तो खुश हो जाते। उनका ये बचपना देख हम बड़े भी कभी तो खुश हो जाते।
उदास मुखड़े दे जाती हैं खुशबू की सौगात और बदल जाती है तपती दोपहर में। उदास मुखड़े दे जाती हैं खुशबू की सौगात और बदल जाती है तपती दोपहर में।
नयन निमंत्रित करते जब जब पढ़ नयनों की भाषा। कजरे ,गजरे की भी अपनी होती हैं अभिलाषा ।। नयन निमंत्रित करते जब जब पढ़ नयनों की भाषा। कजरे ,गजरे की भी अपनी होती हैं अभ...